Supreme God is Kabir Saheb
Supreme God is Kabir Saheb #यथार्थ_भक्ति_बोध_Part4 के आगे पढ़ें 📖📖📖 #यथार्थ_भक्ति_बोध_Part5 2- गाँव दिनौद जिला भिवानी में श्री ताराचन्द जी द्वारा चलाया गया। ये सब 20वीं शताब्दी में पनपे हैं। लगभग पूरे भारत वर्ष में फैल चुके हैं। इनके अतिरिक्त निरंकारी पंथ, ब्रह्मा कुमारी पंथ, हंसा देश पंथ (1- सन्त श्री सतपाल जी, 2- संत श्री प्रेम रावत उर्फ बालयोगेश्वर का पंथ) ये भी उपरोक्त पंथों की तरह भारत वर्ष के साथ-साथ अन्य देशों में भी फैल चुके हैं। उपरोक्त पंथों ने सत्य भक्ति अर्थात् शास्त्रोक्त साधना का नामोनिशान मिटा दिया है। इन पंथों ने ज्योति यज्ञ (हवन यज्ञ) को मना कर रखा है। कहते हैं कि बाहर की ज्योति से मोक्ष नहीं है। शरीर के अन्दर की ज्योति को जगाना है। राधास्वामी पंथ व इसकी शाखाओं का मानना है कि वेद तथा गीता को हम नहीं मानते। हम तो संतों की वाणी को सत्य मानते हैं। वेद व गीता भी तो ऋषियों ने लिखे हैं। उन ऋषियों को ऊपर के मण्डलों का ज्ञान नहीं था। इसलिए वेदों तथा गीता में ऊपर के मण्डलों का ज्ञान नहीं है। हमारी भक्ति साधना तो त्रिकुटी स्थान से प्रारम्भ होती है। हमारे सन्...